बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति पर जबरन कब्जा नहीं: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बेटे-बहू को लेकर स्पष्ट संदेश

देश में बुजुर्गों के अधिकारों से जुड़े मामलों में अदालतें लगातार सख्त रुख दिखा रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया कि बेटे-बहू या अन्य रिश्तेदार बुजुर्ग माता-पिता की स्वयं अर्जित संपत्ति पर जबरन रहने का अधिकार नहीं जता सकते। अदालत ने कहा कि यदि परिवार में विवाद है और बुजुर्ग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो कानून उनका संरक्षण करता है।

क्या है मामला

मामला एक बुजुर्ग दंपती से जुड़ा था, जिन्होंने अदालत से शिकायत की कि उनका बेटा और बहू उनके घर में जबरन रह रहे हैं और उन्हें मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार तभी बनता है जब वे स्वयं अनुमति दें।

कोर्ट ने कहा कि यदि बुजुर्ग अपनी सुरक्षा या सम्मान को खतरे में महसूस करते हैं, तो वे कानूनी तरीके से बेटे-बहू को घर खाली करने के लिए कह सकते हैं।

कोर्ट ने क्या कहा

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि:

  • माता-पिता की स्वयं अर्जित संपत्ति पर उनका पूर्ण अधिकार होता है
  • बेटे-बहू को जबरन रहने का कानूनी अधिकार नहीं
  • बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है
  • यदि परिवार में विवाद है तो प्रशासन बुजुर्गों की मदद कर सकता है

कोर्ट ने यह भी माना कि पारिवारिक संबंधों के नाम पर बुजुर्गों को मानसिक या शारीरिक परेशानी देना कानूनन गलत है।

बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कानून

भारत में Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 बुजुर्गों को संरक्षण देता है। इसके तहत:

  • बुजुर्ग अपने बच्चों से देखभाल की मांग कर सकते हैं
  • संपत्ति वापस लेने का अधिकार भी मिलता है
  • उत्पीड़न होने पर प्रशासन कार्रवाई कर सकता है
  • आवश्यक होने पर घर खाली कराने का आदेश दिया जा सकता है

इस कानून का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन देना है।

फैसले का समाज पर असर

यह फैसला ऐसे मामलों में मिसाल बन सकता है, जहां माता-पिता अपनी ही संपत्ति में असुरक्षित महसूस करते हैं। अदालत का संदेश साफ है कि परिवारिक रिश्तों के नाम पर बुजुर्गों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बुजुर्गों को आत्मविश्वास देगा और उन्हें न्याय पाने का रास्ता आसान बनाएगा।

क्यों अहम है यह फैसला

आज के समय में संपत्ति विवाद और पारिवारिक तनाव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि:

  • संपत्ति का अधिकार मालिक के पास रहेगा
  • सम्मानपूर्वक जीवन बुजुर्गों का मौलिक अधिकार है
  • कानून पारिवारिक दबाव से ऊपर है

यह फैसला समाज में बुजुर्गों की स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Comment