AIIMS Delhi में मरीजों की अचानक बढ़ी भीड़: आखिर क्यों देशभर से लोग यहीं इलाज कराने पहुंच रहे?

देश का सबसे भरोसेमंद सरकारी अस्पताल माना जाने वाला AIIMS दिल्ली इन दिनों मरीजों की भारी भीड़ से जूझ रहा है। पिछले दो सालों में यहां आने वाले मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। ओपीडी से लेकर भर्ती मरीजों तक, हर जगह लंबी कतारें आम हो चुकी हैं।

अब सवाल ये उठता है — आखिर ऐसा क्या बदल गया कि लोग दूर-दराज़ राज्यों से दिल्ली आकर इलाज कराने लगे?

भरोसे का नाम बना AIIMS

गांव-कस्बों में अक्सर लोग कहते हैं — “अगर बीमारी गंभीर हो तो सीधे AIIMS जाओ।”
यह भरोसा यूं ही नहीं बना।

यहां के डॉक्टरों की विशेषज्ञता, आधुनिक मशीनें और रिसर्च आधारित इलाज के कारण मरीजों को लगता है कि यहां सही जांच और सही इलाज मिलेगा। यही वजह है कि छोटे शहरों के डॉक्टर भी जटिल मामलों में मरीजों को यहीं भेज देते हैं।

छोटे शहरों में इलाज की कमी

देश के कई जिलों में अभी भी सुपर-स्पेशलिटी डॉक्टरों और आधुनिक जांच सुविधाओं की कमी है।
दिल, कैंसर, न्यूरो या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों में मरीजों को बड़े संस्थान की जरूरत पड़ती है।

जब आसपास विकल्प नहीं मिलता, तो लोग सीधे दिल्ली का टिकट काटते हैं।

महंगे निजी अस्पताल से राहत

आजकल निजी अस्पतालों का खर्च आम आदमी की जेब से बाहर होता जा रहा है।
सर्जरी, आईसीयू या लंबा इलाज लाखों में पहुंच जाता है।

इसके मुकाबले AIIMS में इलाज कम लागत पर मिलता है।
यही कारण है कि गरीब ही नहीं, मध्यम वर्ग भी यहां इलाज करवाना सुरक्षित समझता है।

कोविड के बाद बढ़ीं बीमारियां

डॉक्टरों के अनुसार कोविड के बाद दिल, फेफड़े, शुगर, ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं।
कई मरीजों को लंबे समय तक विशेषज्ञ इलाज की जरूरत पड़ रही है।

इसका असर बड़े अस्पतालों पर साफ दिख रहा है — और AIIMS इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।

जागरूकता भी बढ़ी, भीड़ भी

पहले लोग छोटी बीमारी को नजरअंदाज कर देते थे।
अब इंटरनेट और हेल्थ कैंपेन के कारण लोग जांच जल्दी करवा लेते हैं।

इससे अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

अस्पताल पर बढ़ता दबाव

मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन संसाधन उसी गति से नहीं बढ़े।
डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ गया है और मरीजों को अपॉइंटमेंट पाने में भी समय लग रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर राज्यों के मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पताल मजबूत किए जाएं, तो AIIMS पर भार कम हो सकता है।

देसी अंदाज़ में समझ लो

सीधी बात है भाई —
जहां इलाज अच्छा, भरोसा पक्का और खर्च कम हो, वहां भीड़ तो लगेगी ही।

AIIMS दिल्ली वही जगह बन चुका है, जहां लोग आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।

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