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महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य में चलाई जा रही पिंक बस सेवा को अब महिला ड्राइवरों के हवाले किया जा रहा है। यह कदम न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
राजधानी समेत कई शहरी इलाकों में पहले से ही महिलाओं के लिए विशेष पिंक बसें संचालित की जा रही हैं। अब सरकार इन बसों में महिला ड्राइवरों की नियुक्ति कर रही है, जिससे सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।
क्यों शुरू की गई यह पहल
सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। कई बार महिलाएं देर रात या अकेले सफर करने से बचती हैं। पिंक बस सेवा का उद्देश्य यही है कि महिलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का विकल्प मिले।
महिला ड्राइवरों की नियुक्ति से यह संदेश भी जाता है कि महिलाएं केवल यात्री नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभाल सकती हैं। इससे सामाजिक सोच में बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कितनी बसें और कितनी महिलाएं शामिल
रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में लगभग 100 पिंक बसें चलाने की योजना है। शुरुआती चरण में कुछ महिला ड्राइवरों को प्रशिक्षण देकर नियुक्त किया गया है, जबकि आगे और महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।
इन महिलाओं को विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग, सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान दिया जा रहा है ताकि वे व्यावसायिक वाहन चलाने में पूरी तरह सक्षम बन सकें।
महादलित और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता
इस योजना की एक खास बात यह है कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और महादलित समुदाय की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिलेगा बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण भी होगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इन महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिले और वे आत्मनिर्भर बन सकें।
महिलाओं की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला ड्राइवरों के साथ चलने वाली बसों में महिलाओं का भरोसा बढ़ेगा। इससे अधिक महिलाएं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सकती है।
साथ ही, यह पहल लड़कियों और युवतियों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकती है, क्योंकि वे अब परिवहन जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्र में भी अपना करियर बना सकती हैं।
आगे की योजना
परिवहन विभाग भविष्य में इस योजना का विस्तार करने की तैयारी में है। अगर यह मॉडल सफल रहता है तो इसे अन्य शहरों और जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह सिर्फ बस सेवा नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सामाजिक अभियान है।