उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब परिवारों के लिए सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करने का फैसला किया है। अब ऐसे मरीज भी महंगे इलाज की सुविधा पा सकेंगे जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जरूरतमंदों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आर्थिक तंगी इलाज में बाधा न बने।
राज्य प्रशासन का कहना है कि कई लोग केंद्र की के पात्र होने के बावजूद कार्ड न बनने या डेटा त्रुटि के कारण लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए में अतिरिक्त स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था लागू की जा रही है।
किन मरीजों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था का लाभ मुख्य रूप से उन परिवारों को मिलेगा:
- जिनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना
- जिनका नाम सूची में नहीं है
- जो आर्थिक रूप से महंगा इलाज नहीं करा सकते
ऐसे मरीजों को जिला प्रशासन की अनुशंसा पर इलाज की सुविधा दी जाएगी।
किन बीमारियों का होगा इलाज
योजना का फोकस गंभीर और महंगे इलाज वाली बीमारियों पर है।
इनमें शामिल हैं:
- कैंसर
- हार्ट सर्जरी और हृदय रोग
- किडनी फेलियर व डायलिसिस
- ब्रेन और न्यूरोलॉजिकल रोग
- अन्य जानलेवा बीमारियां
सरकार का लक्ष्य है कि इलाज के खर्च के कारण कोई मरीज उपचार से वंचित न रहे।
कितना मिलेगा आर्थिक कवर
स्वास्थ्य सहायता के तहत पात्र मरीजों को:
- ₹5 लाख तक का इलाज मुफ्त
- सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में सुविधा
- सर्जरी, दवाइयां और भर्ती खर्च शामिल
यह राशि गंभीर इलाज के लिए पर्याप्त मानी जाती है और इससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
क्यों जरूरी पड़ी यह व्यवस्था
सरकार का कहना है कि कई बार कार्ड न बनने, दस्तावेज़ी समस्या या तकनीकी कारणों से लोग योजना से बाहर रह जाते हैं। लेकिन बीमारी इंतजार नहीं करती, इसलिए तत्काल इलाज की जरूरत होती है।
इसी वजह से राज्य ने यह व्यवस्था बनाई है कि पात्र मरीजों को बिना कार्ड के भी इलाज मिल सके।
कैसे मिलेगा योजना का लाभ
जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, वे:
- जिला अस्पताल में संपर्क करें
- मेडिकल जांच करवाएं
- जिला समिति की सिफारिश पर इलाज स्वीकृत हो सकता है
जरूरत पड़ने पर प्रशासन मरीज को सूचीबद्ध अस्पताल में रेफर कर सकता है।
गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने वाला है। इससे इलाज में देरी कम होगी और गरीब परिवारों को कर्ज लेने या इलाज टालने की मजबूरी नहीं रहेगी।
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है — पैसों की कमी के कारण किसी की जान जोखिम में न पड़े।