डिजिटल करेंसी से भ्रष्टाचार पर रोक की तैयारी: सरकार देशभर में डिजिटल लेन-देन बढ़ाने की दिशा में सक्रिय

भारत में नकदी आधारित अर्थव्यवस्था को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार डिजिटल भुगतान और डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। हाल के सरकारी संकेतों के अनुसार, डिजिटल लेन-देन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाकर भ्रष्टाचार, काले धन और नकली नोटों की समस्या पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम मजबूत होगा, वैसे-वैसे नकद लेन-देन पर निर्भरता घटेगी और वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड स्वतः सुरक्षित रहेगा। इससे टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन पर निगरानी आसान हो सकती है।

क्यों बढ़ रही है डिजिटल करेंसी की चर्चा

भारत में पहले भी नकदी पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए गए हैं। उदाहरण के लिए, 2016 में नोटबंदी के दौरान सरकार ने काले धन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने को प्रमुख उद्देश्य बताया था। उस समय नकदी के उपयोग को घटाकर डिजिटल भुगतान बढ़ाने पर जोर दिया गया था। Government of India का मानना है कि डिजिटल माध्यम पारदर्शिता बढ़ाने का प्रभावी साधन बन सकता है।

आज देश में UPI, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन बैंकिंग के कारण डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्डेड और ट्रेस करने योग्य हो गए हैं। इससे संदिग्ध लेन-देन की पहचान करना आसान हो जाता है।

डिजिटल करेंसी लागू होने से क्या फायदे होंगे

  1. भ्रष्टाचार पर निगरानी आसान
    डिजिटल भुगतान का हर रिकॉर्ड सिस्टम में रहता है, जिससे गैर-कानूनी पैसों के प्रवाह पर नजर रखी जा सकती है।
  2. काले धन पर रोक
    नकदी छिपाना आसान होता है, लेकिन डिजिटल मनी का हिसाब रहता है, जिससे टैक्स चोरी घट सकती है।
  3. नकली नोटों की समस्या कम
    डिजिटल करेंसी में नकली नोट की समस्या नहीं होती, जिससे आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है।
  4. सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
    DBT (Direct Benefit Transfer) जैसी योजनाओं में डिजिटल सिस्टम से पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुँचता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि डिजिटल करेंसी और डिजिटल भुगतान के कई फायदे हैं, लेकिन विशेषज्ञ कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा करते हैं।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी
  • साइबर फ्रॉड और डेटा सुरक्षा का खतरा
  • बुजुर्ग और कम शिक्षित लोगों के लिए डिजिटल सिस्टम अपनाना मुश्किल

इसी कारण सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने पर भी काम कर रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने से टैक्स बेस बढ़ सकता है, जिससे सरकारी राजस्व में वृद्धि संभव है। इससे विकास योजनाओं के लिए अधिक संसाधन मिल सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि डिजिटल करेंसी को सही तरीके से लागू किया गया तो यह देश की अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बना सकती है।

आगे क्या

सरकार की रणनीति स्पष्ट है — नकदी पर निर्भरता कम करना, डिजिटल लेन-देन बढ़ाना और आर्थिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना। आने वाले वर्षों में डिजिटल करेंसी और कैशलेस इकोनॉमी भारत की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

Leave a Comment