नई दिल्ली: खगोल विज्ञान और प्राकृतिक घटनाओं में रुचि रखने वाले लोग आज 17 फरवरी 2026 को एक विशेष खगोलीय घटना का आनंद लेने वाले हैं। इस दिन भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) देखा जाएगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक रहेगा और वैज्ञानिकों के अनुसार यह वर्ष 2026 का पहला प्रमुख सूर्य ग्रहण है।
सूर्य ग्रहण 2026 का समय और विवरण
ग्रहण की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:
- आरंभ: 9:15 बजे IST
- समापन: 1:45 बजे IST
- कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 30 मिनट
- प्रकार: आंशिक सूर्य ग्रहण
इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ढक देगा, लेकिन पूरा सूर्य कभी भी नहीं छुपेगा। इसलिए इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
भारत में सूर्य ग्रहण की दृश्यता
भारत के विभिन्न राज्यों में ग्रहण अलग-अलग दिखाई देगा। विशेषज्ञों के अनुसार:
- उत्तर भारत: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में सूर्य का लगभग 20-30% हिस्सा छिपा दिखाई देगा।
- पूर्वी भारत: पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में ग्रहण का दृश्य कुछ कम होगा, लगभग 15-25% सूर्य ढंका दिखाई देगा।
- दक्षिण और पश्चिम भारत: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण का दृश्य देखने के लिए साफ और खुले आकाश वाली जगह चुनना आवश्यक है।
सूर्य ग्रहण कैसे होता है?
सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूरी तरह से रोक देता है।
- चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है
- जब छाया का केंद्र सीधे पृथ्वी पर होता है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है
- आंशिक ग्रहण में सूर्य का एक हिस्सा हमेशा दिखाई देता है
वैज्ञानिकों ने गणना की है कि इस साल का सूर्य ग्रहण कई शहरों में सुबह के समय दिखाई देगा और ग्रहण के दौरान सूर्य का एक हिस्सा छुपा रहेगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान सुरक्षा उपाय
सूर्य ग्रहण का अनुभव करना आकर्षक है, लेकिन इसके दौरान आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने कुछ सुरक्षा उपाय बताए हैं:
- सोलर ग्लासेस (Solar Eclipse Glasses) का उपयोग करें।
- सामान्य धूप के चश्मे या कांच से सूर्य न देखें।
- बच्चों और वृद्धजनों को अकेले ग्रहण देखने की अनुमति न दें।
- घर पर मौजूद पिनहोल प्रोजेक्टर से भी सूर्य ग्रहण देखा जा सकता है।
सावधानी न रखने पर आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
खगोल विज्ञान और डेटा
- सूर्य का व्यास: 1.39 मिलियन किलोमीटर
- चंद्रमा का व्यास: 3,474 किलोमीटर
- पृथ्वी और सूर्य की दूरी: लगभग 149.6 मिलियन किलोमीटर
- चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी: लगभग 384,400 किलोमीटर
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चंद्रमा का आकार सूर्य के सामने सही अनुपात में आता है, जिससे ग्रहण जैसी घटनाएँ संभव होती हैं।
ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व
भारत में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है।
- लोग ग्रहण के दौरान पवित्र नहाने, दान, और पूजा-पाठ करते हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु और केतु के प्रभाव के कारण ग्रहण का समय विशेष माना जाता है।
- कुछ परिवार ग्रहण काल में खाना नहीं खाते, जबकि कुछ लोग केवल हल्का भोजन करते हैं।
ग्रहण के दौरान किए गए धार्मिक कार्यों को शुभ माना जाता है और इसे धार्मिक शुद्धि का समय भी कहा जाता है।
वैज्ञानिक महत्व
सूर्य ग्रहण का अध्ययन खगोलशास्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ग्रहण के दौरान:
- सूर्य के क्रोना (Corona) का अध्ययन किया जा सकता है
- सूरज के सौर धब्बे (Sunspots) की गतिविधि पर नजर रखी जाती है
- वैज्ञानिक ग्रहण के समय ग्रह और तारों की स्थिति रिकॉर्ड करते हैं
इस ग्रहण से नई खोजों और डेटा संग्रह में मदद मिलती है, जिससे भविष्य के खगोलीय घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी संभव होती है।
संक्षेप में
- तारीख: 17 फरवरी 2026
- समय: 9:15 बजे से 1:45 बजे
- कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 30 मिनट
- भारत में दृश्यता: केवल आंशिक रूप से, उत्तर और पूर्वी राज्यों में
- सुरक्षा: सीधे सूर्य की ओर न देखें, सोलर ग्लास का उपयोग करें
यह सूर्य ग्रहण विज्ञान, खगोलशास्त्र और धार्मिक दृष्टिकोण से एक विशेष अवसर है। इस दिन आकाश पर नजर रखना और सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।