भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार, 56 देशों में वीज़ा-फ्री एंट्री; वैश्विक हालात पर बढ़ी चिंता

हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में के पासपोर्ट की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। नई रैंकिंग के अनुसार भारतीय पासपोर्ट अब दुनिया में 75वें स्थान पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय नागरिकों को कई देशों में बिना वीज़ा या आसान वीज़ा प्रक्रिया के साथ यात्रा की सुविधा मिल रही है।

यह रैंकिंग वैश्विक स्तर पर जारी किए जाने वाले के आधार पर तय की जाती है, जिसमें विभिन्न देशों के पासपोर्ट की ताकत उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुविधाओं के अनुसार मापी जाती है।

56 देशों में आसान यात्रा का रास्ता

नई सूची के मुताबिक भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब लगभग 56 देशों में वीज़ा-फ्री, वीज़ा-ऑन-अराइवल या ई-वीज़ा सुविधा मिल रही है।

इनमें एशिया, अफ्रीका और कैरेबियन क्षेत्र के कई देश शामिल हैं, जहां भारतीय पर्यटक बिना लंबी वीज़ा प्रक्रिया के यात्रा कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार भारत की कूटनीतिक पहुंच, आर्थिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मजबूत होने का संकेत है। इससे पर्यटन, व्यापार और शिक्षा के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

पासपोर्ट मजबूत होने का क्या मतलब

पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार सिर्फ यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं होता।

इसका मतलब होता है कि:

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्वीकार्यता बढ़ रही है
  • व्यापार और निवेश के रास्ते आसान हो सकते हैं
  • विदेशी विश्वविद्यालयों और कंपनियों तक पहुंच बेहतर होती है
  • पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वीज़ा समझौते और बढ़ते हैं तो आने वाले वर्षों में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

दुनिया के हालात को लेकर बढ़ती चिंता

इसी बीच एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में यह भी सामने आया है कि पश्चिमी देशों के कई नागरिकों को लगता है कि वैश्विक तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के कई हिस्सों में लोगों को आशंका है कि भविष्य में बड़े सैन्य संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सर्वे जनमत को दर्शाते हैं, न कि किसी तत्काल युद्ध की संभावना को।

भारत के लिए इसका क्या महत्व

एक ओर पासपोर्ट की रैंकिंग सुधरना भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होने का संकेत है, वहीं दूसरी ओर बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात भारत जैसे बड़े देश के लिए रणनीतिक सतर्कता की जरूरत भी दिखाते हैं।

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की संतुलित कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग नीति आने वाले समय में उसकी वैश्विक भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकती है।

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