नई दिल्ली: एक ताज़ा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पता चला है कि भारत अब दुनिया के शीर्ष 6 देशों में शामिल हो गया है जो सबसे अधिक Greenhouse Gases (ग्रीनहाउस गैसों) का उत्सर्जन करते हैं। यह चेतावनी Nature Climate Change नामक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुई रिपोर्ट में दी गई है।
स्टडी में यह साफ़ किया गया है कि 2025 तक भारत का कुल GHG उत्सर्जन काफी बढ़ गया है, और वैश्विक तापमान वृद्धि के लिए इसका असर बढ़ता जा रहा है।
ग्लोबल रैंकिंग: भारत शीर्ष 6 में क्यों?
वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, दुनिया में नीचे के देशों ने सबसे ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित की हैं:
- चीन
- अमेरिका
- यूरोपीय संघ (क्लस्टर के रूप में)
- रूस
- जापान
- भारत
विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत का विकास दर तेज़ होने के कारण ऊर्जा की मांग भी बढ़ी है, जिससे उत्सर्जन स्तर में बढ़ोतरी होने लगी है।
GHG उत्सर्जन से क्या होता है प्रभाव?
Greenhouse Gases जैसे CO₂, Methane और Nitrous Oxide पृथ्वी के तापमान को ऊपर की ओर धकेलते हैं। इसका सीधा असर:
- ग्लोबल वार्मिंग
- मौसम परिवर्तन
- हिमनदों का पिघलना
- समुद्र स्तर का बढ़ना
- सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ
ये प्रभाव हर साल लाखों लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, खासकर उन देशों में जो पर्यावरण सुरक्षा उपायों को लागू नहीं कर पा रहे हैं।
भारत में कौन से सेक्टर ज़िम्मेदार?
रिपोर्ट के अनुसार भारत में emissions के मुख्य स्रोत हैं:
1. बिजली उत्पादन
भारत की अधिकांश बिजली कोयले और जीवाश्म ईंधन पर आधारित है, जिससे CO₂ उत्सर्जन बढ़ता है।
2. औद्योगिक गतिविधियाँ
सिमेंट, स्टील और पेट्रोलियम जैसी इंडस्ट्रीज़ भारी मात्रा में गैसें उत्पन्न करती हैं।
3. परिवहन
वाहनों की संख्या में वृद्धि और पेट्रोल‑डीज़ल का उपयोग भी उत्सर्जन में इज़ाफ़ा करता है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ. अंशुल भारती कहते हैं:
“भारत का विकास बहुत तेज़ है, लेकिन इसकी ऊर्जा नीति को ग्रीन और क्लीन दिशा में मोड़ने की ज़रूरत है। अगर उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया तो भारत भी अन्य बड़े उत्सर्जक देशों जैसे स्थिति में पहुंच जाएगा।”
सरकार की पहल और चुनौतियाँ
भारत ने पहले ही कई पर्यावरण‑हितैषी कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन का विस्तार
- इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रमोशन
- स्वच्छ ऊर्जा प्रोत्साहन योजनाएँ
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि तालमेल और तेजी से निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि Paris Agreement जैसे वैश्विक तापमान लक्ष्य पूरे किए जा सकें।
आगे क्या?
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि CO₂ और अन्य GHGs पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो 2030 तक दुनिया का औसत तापमान 1.5°C से ऊपर जा सकता है। इससे ग्लोबल इकोलॉजी और मानव जीवन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।
भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह चुनौती डबल है —
विकास भी चाहिए और पर्यावरण सुरक्षा भी।
निष्कर्ष
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जिनका GHG उत्सर्जन सबसे ज़्यादा है।
इसका मतलब है कि देश को:
- ऊर्जा संरचना बदलनी होगी
- साफ ऊर्जा की दिशा में कदम तेज़ करने होंगे
- सार्वजनिक नीति और उद्योगों को Responsible बनाना होगा
ताकि दुनिया को एक सुरक्षित और स्थिर पर्यावरण प्रदान किया जा सके।