सड़कों पर मौत का कोहरा: हादसों के बढ़ते खतरे के बीच सरकार ला रही ‘बात करने वाली गाड़ियाँ’ टेक्नोलॉजी

भारत में सर्दियों के मौसम के साथ ही सड़कों पर कोहरे का खतरा बढ़ जाता है, और इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ती है। हाल के वर्षों में एक्सप्रेसवे और हाईवे पर हुए कई बड़े हादसों ने यह साफ कर दिया है कि केवल स्पीड या नियम ही नहीं, बल्कि विजिबिलिटी और तकनीक की कमी भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है।

घने कोहरे के कारण कई बार ड्राइवरों को आगे खड़ी गाड़ी तक दिखाई नहीं देती, जिससे चेन-कोलिजन यानी एक के बाद एक वाहन टकराने की घटनाएँ सामने आती हैं। उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए एक बड़े हादसे में कई वाहन आपस में भिड़ गए थे और दर्जनों लोग घायल हुए थे, जबकि एक दुर्घटना में 13 लोगों की मौत तक हो गई थी। इस घटना ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

कोहरा बना सबसे बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार कोहरे में विजिबिलिटी कई बार 50 मीटर से भी कम रह जाती है। ऐसी स्थिति में तेज रफ्तार वाहन अचानक सामने आने वाली गाड़ी या बस से टकरा जाते हैं। कुछ मामलों में आधे घंटे के अंदर कई दुर्घटनाएँ होने की खबरें भी सामने आईं, जिनमें जानें तक चली गईं।

इसी वजह से हर साल सर्दियों में कई एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट घटा दी जाती है। कुछ जगहों पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 किमी/घंटा से घटाकर 75 किमी/घंटा कर दी गई, ताकि हादसों को रोका जा सके।

सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की नई योजना

लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए सरकार अब नई टेक्नोलॉजी का सहारा लेने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ऐसी तकनीक लागू करने की तैयारी में है जिससे वाहन आपस में “बात” कर सकें। इसे Vehicle-to-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन कहा जाता है।

इस तकनीक की मदद से गाड़ियाँ एक-दूसरे को अपनी स्पीड, लोकेशन और दिशा की जानकारी रियल-टाइम में भेज सकेंगी। इससे ड्राइवर को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा कि आगे कोई वाहन खड़ा है या अचानक ब्रेक लगा है, जिससे टक्कर का खतरा कम हो सकता है। सरकार का मानना है कि यह तकनीक सड़क हादसों को कम करने में बड़ा बदलाव ला सकती है और इसे आने वाले वर्षों में लागू किया जा सकता है।

क्यों जरूरी है नई टेक्नोलॉजी

भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और हजारों लोगों की जान जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हादसों के तीन बड़े कारण हैं:

  • तेज रफ्तार
  • खराब विजिबिलिटी (खासकर कोहरे में)
  • सड़क पर खड़े वाहन या अचानक ब्रेक

V2V सिस्टम इन तीनों समस्याओं पर एक साथ काम कर सकता है। यह ड्राइवर को अलर्ट भेजकर रिएक्शन टाइम बढ़ा देता है, जिससे हादसा टाला जा सकता है।

प्रशासन भी कर रहा जागरूकता अभियान

कई शहरों में परिवहन विभाग ने ड्राइवरों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि कोहरे में लो-बीम हेडलाइट, फॉग लाइट, कम स्पीड और ज्यादा दूरी रखना बेहद जरूरी है। कुछ जगहों पर शराब पीकर वाहन चलाने पर विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

आगे क्या बदलेगा

यदि सरकार की नई तकनीकी योजना लागू होती है तो आने वाले वर्षों में गाड़ियाँ सिर्फ मशीन नहीं रहेंगी, बल्कि एक स्मार्ट नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगी। इससे एक्सप्रेसवे पर होने वाले बड़े हादसों को रोका जा सकता है और यात्रा ज्यादा सुरक्षित हो सकती है।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सड़कें सिर्फ चौड़ी और तेज नहीं होंगी, बल्कि डिजिटल और स्मार्ट भी होंगी — जहां गाड़ियाँ पहले से खतरे की सूचना दे देंगी और हादसे होने से पहले ही रुक जाएंगे।

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