राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल नियम में बड़ा बदलाव: आंशिक रूप से चालू सड़कें अब कम शुल्क पर, 15 फरवरी 2026 से लागू

सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। नए नियमों के अनुसार, जिन एक्सप्रेसवे हिस्सों का निर्माण अधूरा है और जो आंशिक रूप से ही चालू हैं, उन पर अब टोल शुल्क कम लिया जाएगा। यह कदम यात्रियों और व्यापारिक वाहनों के लिए वित्तीय राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है। नया नियम 15 फरवरी 2026 से लागू होगा।

नया टोल नियम क्या कहता है

  1. आंशिक रूप से चालू सड़कें: जिन हिस्सों पर सड़क निर्माण अधूरा है, वहां यात्रियों को अब पूरे टोल शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।
  2. शुल्क की गणना का तरीका: टोल शुल्क उस अनुपात के आधार पर लिया जाएगा जितना रोड खंड चालू है। उदाहरण के लिए, अगर किसी एक्सप्रेसवे का केवल 60% हिस्सा चालू है, तो यात्रियों को केवल 60% टोल शुल्क देना होगा।
  3. लंबित निर्माण पर असर: यह नियम उन परियोजनाओं पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा जिनका निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पाया है, जिससे निर्माण कंपनियों पर गति बढ़ाने का दबाव होगा।
  4. स्मार्ट टोलिंग सिस्टम: कुछ टोल प्लाज़ा पर इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग सिस्टम के माध्यम से स्वचालित रूप से आंशिक शुल्क की गणना होगी, जिससे यात्रियों को सही राशि का भुगतान करना आसान होगा।

सरकार का उद्देश्य

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि यह निर्णय यात्रियों के लिए वित्तीय बोझ कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि टोल शुल्क का उद्देश्य मार्ग का रख-रखाव और विकास कार्यों को जारी रखना है, न कि यात्रियों से अत्यधिक शुल्क वसूलना।

आम यात्रियों और व्यापार पर प्रभाव

  • यात्रियों के लिए राहत: अब यात्रियों को अधूरी सड़क के लिए पूरा टोल भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
  • व्यापारिक वाहनों के लिए लाभ: माल ढुलाई वाहनों के लिए यात्रा लागत कम होगी, जिससे व्यवसायियों को लाभ होगा।
  • निर्माण कंपनियों पर प्रभाव: अधूरी परियोजनाओं के तेजी से पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाएगी।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर: कम टोल शुल्क से लोगों की यात्रा आसान होगी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

लागू होने की तारीख और प्रक्रिया

नए टोल नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। इसके बाद सभी टोल प्लाज़ा पर बदलाव लागू कर दिए जाएंगे। टोल ऑपरेटरों को आदेश दिया गया है कि वे आंशिक रूप से चालू सड़क खंडों के लिए उचित शुल्क वसूली के लिए प्रणाली तैयार करें।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक और परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय देश में टोल नीति में पारदर्शिता और न्यायसंगत दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और टोल वसूली में विवादों की संभावना कम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति भविष्य में एक्सप्रेसवे निर्माण परियोजनाओं में गति और गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद करेगी।

देशभर में क्या बदलाव देखने को मिल सकता है

  • यात्री संतोष बढ़ेगा: अधूरी परियोजनाओं के लिए अधूरा शुल्क वसूलने की शिकायतें कम होंगी।
  • निर्माण परियोजनाओं की समयबद्धता: अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का दबाव निर्माण कंपनियों पर बढ़ेगा।
  • टोल नीति में पारदर्शिता: हर एक्सप्रेसवे खंड के लिए स्पष्ट शुल्क निर्धारण होगा।
  • आर्थिक बचत: यात्रियों और व्यापारिक वाहनों के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ होगा।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा टोल नियम में यह बदलाव न केवल यात्रियों के लिए राहतकारी है, बल्कि एक्सप्रेसवे निर्माण और रख-रखाव की पारदर्शिता को भी बढ़ावा देता है। यह नीति यह संदेश देती है कि अधूरी परियोजनाओं के लिए यात्रियों से पूरा शुल्क वसूलना उचित नहीं है। 15 फरवरी 2026 से लागू होने वाले ये नियम देशभर में टोल वसूली में नई दिशा दिखाएंगे और यात्रियों के विश्वास को मजबूत करेंगे।

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