देश के बैंकिंग सेक्टर में ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में जारी निर्देशों में केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया है कि अगर बैंक किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर बीमा, निवेश योजना या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचते हैं, तो उन्हें पूरा पैसा वापस करना होगा।
यह फैसला उन लाखों ग्राहकों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है, जिन्हें अक्सर बैंक कर्मचारियों द्वारा बिना पूरी जानकारी दिए पॉलिसी, फंड या अन्य योजनाएं लेने के लिए मनाया जाता है।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम
पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग लोकपाल और शिकायत पोर्टलों पर बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आईं, जिनमें ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उन्हें बचत खाता खोलने, एफडी करने या लोन लेने के दौरान बीमा और निवेश उत्पाद लेने के लिए मजबूर किया गया।
कई मामलों में ग्राहकों को यह भी नहीं बताया गया कि:
- उनका पैसा लंबे समय के लिए लॉक हो जाएगा
- योजना में जोखिम हो सकता है
- समय से पहले पैसे निकालने पर नुकसान होगा
ऐसे मामलों में ग्राहक बाद में समझते थे कि उन्होंने जो लिया, वह उनकी जरूरत का उत्पाद नहीं था। RBI ने अब इसी समस्या को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अब बैंक की जिम्मेदारी तय होगी
नए नियमों के अनुसार अगर कोई ग्राहक यह साबित कर देता है कि उसे गलत जानकारी देकर प्रोडक्ट बेचा गया था, तो बैंक को पूरा रिफंड देना होगा।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
- बीमा पॉलिसी
- निवेश योजनाएं
- म्यूचुअल फंड या बंडल्ड प्रोडक्ट
- थर्ड पार्टी फाइनेंशियल प्रोडक्ट
इसका मतलब साफ है कि अब बैंक सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिए ग्राहकों पर प्रोडक्ट नहीं थोप सकेंगे।
ग्राहकों की सहमति अब सिर्फ कागज नहीं होगी
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक की सहमति सिर्फ साइन कराने से पूरी नहीं मानी जाएगी।
बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- ग्राहक को प्रोडक्ट की पूरी जानकारी दी गई हो
- जोखिम समझाया गया हो
- ग्राहक ने स्वेच्छा से प्रोडक्ट चुना हो
अगर बैंक यह साबित नहीं कर पाए, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रिकवरी एजेंट्स पर भी कसने वाली लगाम
केंद्रीय बैंक ने सिर्फ मिस-सेलिंग ही नहीं, बल्कि लोन रिकवरी प्रक्रिया पर भी सख्त रुख अपनाया है।
नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि रिकवरी एजेंट्स को सभ्य और सम्मानजनक व्यवहार करना होगा।
अब:
- धमकी देना प्रतिबंधित होगा
- सार्वजनिक रूप से अपमान नहीं किया जा सकेगा
- अजीब समय पर कॉल नहीं की जा सकेगी
- परिवार या पड़ोसियों को परेशान करना गलत माना जाएगा
यदि एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो बैंक को जिम्मेदार माना जाएगा।
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब
इन फैसलों से आम बैंक ग्राहक को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं:
- अब जबरन बीमा या निवेश लेने का दबाव कम होगा
- गलत प्रोडक्ट लेने पर पैसा वापस मिल सकता है
- रिकवरी एजेंट्स का डर कम होगा
- बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी
- ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बैंकिंग सेक्टर में ग्राहक-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए क्या संकेत
इन निर्देशों से बैंकिंग सेक्टर को साफ संदेश मिला है कि अब सिर्फ बिक्री के आंकड़े बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं हो सकता।
बैंकों को अब:
- कर्मचारियों को बेहतर ट्रेनिंग देनी होगी
- ग्राहक की जरूरत समझकर प्रोडक्ट देना होगा
- दस्तावेजी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना होगा
- शिकायत निवारण सिस्टम मजबूत करना होगा
जो बैंक इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें जुर्माना और सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
भरोसे की दिशा में बड़ा कदम
RBI का यह कदम ऐसे समय आया है जब डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है और लोग वित्तीय उत्पादों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में ग्राहकों को सुरक्षित महसूस कराना बेहद जरूरी हो गया था।
अगर ये नियम सही तरीके से लागू होते हैं, तो आने वाले समय में बैंकिंग सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद और ग्राहक-हितैषी बन सकता है।