भारत ने अपने हिस्से के नदी जल के बेहतर उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पंजाब-जम्मू क्षेत्र में बन रही परियोजना अब अंतिम चरण में है और इसके शुरू होते ही रावी नदी का वह अतिरिक्त पानी भारत में ही इस्तेमाल किया जाएगा, जो वर्षों से बिना उपयोग के पाकिस्तान की ओर बह जाता था।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का मकसद देश के हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है ताकि सिंचाई, बिजली और पेयजल की जरूरतें पूरी की जा सकें।
वर्षों पुरानी परियोजना, अब पूरी होने के करीब
शाहपुर कंडी परियोजना की योजना कई दशक पहले बनाई गई थी, लेकिन राज्यों के बीच प्रशासनिक विवादों और तकनीकी कारणों से इसका काम लंबे समय तक अटका रहा। बाद में केंद्र के हस्तक्षेप से निर्माण फिर शुरू हुआ और इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में शामिल किया गया।
अब यह डैम उत्तर भारत के जल प्रबंधन ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है।
किसानों और राज्यों को क्या मिलेगा फायदा
परियोजना के पूरा होने से और के कई इलाकों में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। अनुमान है कि हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को नियमित पानी मिल सकेगा।
इसके साथ ही:
- सूखे प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुधरेगी
- बिजली उत्पादन में मदद मिलेगी
- भूजल पर निर्भरता कम होगी
- बाढ़ नियंत्रण और जल भंडारण बेहतर होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पाकिस्तान पर संभावित प्रभाव
अब तक रावी नदी का काफी हिस्सा बिना उपयोग के भारत से निकलकर पहुंच जाता था। लेकिन परियोजना के चालू होने के बाद यह प्रवाह कम हो सकता है, जिससे वहां के कुछ इलाकों में जल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि भारत का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत अपने अधिकार वाले पानी का ही उपयोग कर रहा है और यह कदम जल प्रबंधन और विकास से जुड़ा है, न कि किसी राजनीतिक निर्णय से।
भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक महत्व
जल विशेषज्ञों के अनुसार, अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करना किसी भी देश की दीर्घकालिक विकास नीति का हिस्सा होता है। इस परियोजना से न सिर्फ खेती को फायदा होगा बल्कि ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए भी संसाधन मिलेंगे।
इसके अलावा यह परियोजना सीमा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भी सहायक मानी जा रही है।
आगे की स्थिति
अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना के पूरी तरह चालू होने के बाद रावी का अतिरिक्त पानी देश के अंदर ही इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उत्तर भारत के कई जिलों में जल संकट कम करने में मदद मिल सकती है और क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।