उत्तर प्रदेश में शराब पीने वालों के लिए आने वाले वित्तीय वर्ष से खर्च बढ़ने वाला है। राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। इस नीति का असर सीधे शराब की कीमतों, दुकानों के लाइसेंस और सरकारी राजस्व पर पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना, शराब बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और अवैध कारोबार पर नियंत्रण करना है।
देसी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी
नई नीति के तहत 36 प्रतिशत अल्कोहल वाली देसी शराब पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी गई है। इसके चलते देसी शराब की बोतल की कीमत औसतन लगभग 5 रुपये तक बढ़ सकती है।
पहले जो बोतल करीब 165 रुपये में मिलती थी, वह अब लगभग 173 रुपये तक पहुंच सकती है। यह बढ़ोतरी छोटे पैक और मिनिएचर बोतलों पर भी लागू होगी।
अंग्रेज़ी शराब और अन्य कैटेगरी पर असर
नई आबकारी नीति में अंग्रेज़ी शराब की कीमतों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है। अलग-अलग श्रेणियों में इसकी कीमतों में लगभग 10 से 30 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार ने शराब दुकानों की लाइसेंस फीस और कोटा प्रणाली में भी बदलाव किया है, जिससे वितरण व्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके।
सरकार का बड़ा राजस्व लक्ष्य
नई नीति के साथ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए करीब 71 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आबकारी राजस्व लक्ष्य तय किया है। देसी शराब की कीमत बढ़ने से ही करीब 1500 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व आने का अनुमान है।
इसके अलावा, राज्य शराब उद्योग के निर्यात को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में भी काम कर रहा है, जिससे उद्योग और रोजगार दोनों में वृद्धि की उम्मीद है।
दुकानों और लाइसेंस सिस्टम में बदलाव
नई नीति में शराब दुकानों के आवंटन के लिए ई-लॉटरी प्रणाली पर जोर दिया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ाने और पुराने लाइसेंस सिस्टम में सुधार करने की कोशिश की जा रही है।
शहरी इलाकों में दुकानों की संख्या और वितरण को भी नियंत्रित किया जाएगा, ताकि अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाई जा सके।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
नई आबकारी नीति लागू होने के बाद शराब खरीदने वालों को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं सरकार का दावा है कि इससे अवैध शराब पर रोक लगेगी, गुणवत्ता नियंत्रण बेहतर होगा और राज्य को अधिक राजस्व मिलेगा।
आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो यह कदम राज्य की आय बढ़ाने और शराब व्यापार को व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।